बाड़मेर में महिलाएं फूल-पत्तियों और सब्जियों से बना रही प्राकृतिक गुलाल, उस गुलाल को खाया भी जा सकता है

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महिलाएं फूल-पत्तियों और सब्जियों से बना रही प्राकृतिक गुला

रंगो के पर्व होली के आते ही बाड़मेर में भी इसकी तैयारियां जोरो-सोरो से शुरू हो चुकी हैं. होली के पर्व पर केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग हो जिससे शरीर पर बुरा असर न पड़े. यदि केमिकल युक्त रंगों से होली खेली जाए तो पर्व का आनंद कुछ और ही होता है. इसलिए बाड़मेर शहर में केमिकल युक्त रंगों को लेकर नया प्रयोग हुआ है. बाड़मेर की महिलाएं अब खाद्य सामग्री व फूलों से केमिकल युक्त रंग बना रही है. गुलाल बनाने के लिए अरारोट पाउडर के साथ प्राकृतिक रंगों के अर्क को मिलाया जाता है. चुकंदर से गुलाबी रंग, पालक भाजी से हरा रंग और हल्दी व गेंदा से पीला रंग बनाया जा रहा है.

महिलाएं फूल-पत्तियों और सब्जियों से बना रही प्राकृतिक

दरअसल एक ही परिवार की हीरा देवी,मीरा देवी,इंदु देवी, लासी देवी,निर्मला और रोहिणी मिलकर हर्बल रंग तैयार करने में जुटी हुई है. इन महिलाओ ने वर्ष 2022 में राजीविका महिला स्वयं सहायता समूह में प्रशिक्षण लिया था. अब महिलाऍ अपने घर पर ही खाद्य सामग्री से केमिकल युक्त रंग बनाने में जुटी हुई है.

बाजार मे सजे प्राकृतिक गुलाल

 

केमिकल युक्त रंग बनाने वाली मीरा प्रजापत बताती है कि इन प्राकृतिक रंगों के उपयोग से हम इंफेक्शन जैसे रोगों से बच सकते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि यह रंग आसानी से निकल जाता है और पर्यावरण के अनुकूल भी है. मीरा बताती है कि एक दिन में खाद्य सामग्री व फूलों से करीब 30 किलो हर्बल रंग तैयार कर देते है. मीरा प्रजापत बताती है कि घर पर बैठे आसान तरीके से हर्बल रंग तैयार कर रहे है जोकि बाजारों में आने वाले केमिकल रंगों को मात दे रहे है. प्राकृतिक रंग में हरे रंग के लिए पालक, धनिया पाउडर, मेहंदी, गुलाबी रंग के लिए चुकंदर, गुलाब की पंखुड़ी, लाल रंग के लिए अनार का छिलका, गाजर, टमाटर, पीले रंग के लिए हल्दी, बेसन, नारंगी रंग के लिए पलाश के फूल, बैंगनी रंग के लिए जामुन व चुकंदर आदि के साथ चावल आटे व आरारोट आटे का उपयोग कर किया जाता है.

बाजार मे प्रकार्तिक रंग बेचती महिला

मीरा प्रजापत बताती है कि 2022 में इन्होंने करीब 200 किलो प्राकृतिक गुलाल बाजार में बेचा था तो वहीं इस वर्ष उससे ज्यादा की उम्मीद है होली के 2 दिन पहले ही करीब 50 किलो गुलाल बिक चुका है लोगों को कम पता है इसलिए अभी तक डिमांड कम है यदि कोई एक साथ गुलाल ज्यादा ले जाता है तो 300 रुपए प्रति किलो के हिसाब से उसे दिया जाता है और यदि कोई कम ले जाता है तो उसे 350 रुपए प्रति किलो के हिसाब से दिया जाता है

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